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Hanuman Chalisa

 ॥ दोहा॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥ ॥ चौपाई ॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुण्डल कुँचित केसा ॥४ हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेउ साजै ॥ शंकर सुवन केसरी नंदन । तेज प्रताप महा जगवंदन ॥ बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥८ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥ भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे ॥ लाय सजीवन लखन जियाए । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं की...

Shiv Mantra

  ॐ नमस्ते अस्तु भगवान विश्वेश्वराय महादेवाय त्रियम्बकाये त्रिपुरान्तकाय त्रिकाग्नि कालाये कालाग्नि रुद्राए नीलकंठाय मृतुंजयाय सर्वेश्वराय सदाशिवाय श्रीमन् महादेवाय नमः हे भगवान, आपको नमस्कार है, हे ब्रह्मांड के भगवान, उन सभी में सबसे महान! वह जिसके पास तीन आंखें हैं (सर्वज्ञता की आंख), वह जो आत्मज्ञान देता है जो तीन (सूक्ष्म, भौतिक और कारण) दुनिया से परे है, वह जो अग्नि की तरह तीनों काल (भूत, वर्तमान, भविष्य) को अपने भीतर भस्म कर देता है, समय की तरह, वह जो सब कुछ समाप्त कर देता है। उस समय की तरह जो दुनिया को क्रम में रखता है, वह जिसका शरीर विशाल है (आकाश, महासागरों की तरह नीला), जिसने मृत्यु / समय के देवता यम को जीत लिया है। सभी प्राणियों के भगवान, चेतना जो दुनिया से अछूती है फिर भी दुनिया में सब कुछ उसी के कारण है।

👉जाने नवग्रहो को शांत करने के अचूक उपाय 😊👍*

आजकल लोग अनुभव सिद्ध एवं व्यवहारिक उपाय चाहते हैं ताकि आम व्यक्ति, जन सामान्य एवं पीड़ित व्यक्ति लाभ उठा सके। ग्रहों की शांति के लिए सरल एवं अचूक उपाय प्रस्तुत हैं- जिसमें लाल किताब व ऋषि पाराशर प्रणीत ज्योतिष शास्त्र के उपाय सम्मिलित हैं। संसार में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी ग्रह से पीड़ित है। हर व्यक्ति धन-धान्य संपन्न भी नहीं है। ग्रह-पीड़ा के निवारण के लिए निर्धन एवं मध्यम वर्ग का व्यक्ति दुविधा में पड़ जाता है। यह वर्ग न तो लंबे-चौड़े यज्ञ, हवन या अनुष्ठान करवा सकता है, न ही हीरा, पन्ना, पुखराज जैसे महंगे रत्न धारण कर सकता है। ज्योतिष विद्या देव विद्या है। यदि ज्योतिषियों के पास जाएं तो वे प्रायः पुरातन ग्रंथों में से लिए गए उपाय एवं रत्न धारण करने की सलाह दे देते हैं। परंतु आजकल लोग अनुभव सिद्ध एवं व्यवहारिक उपाय चाहते हैं ताकि आम व्यक्ति, जन सामान्य एवं पीड़ित व्यक्ति लाभ उठा सकें। ग्रहों की शांति के लिए सरल एवं अचूक उपाय प्रस्तुत हैं- जिसमें लाल किताब के अनुसार व ऋषि पाराशर प्रणीत ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उपाय बताए गए हैं। पाराशर एस्ट्रोलॉजी के अनुसार : 1. सूर्य ग्रहों का राजा ह...

विभिन्न रूद्राक्षो के बारे में जानकारी।

एक मुखी रुद्राक्ष एक मुखी रुद्राक्ष को शिव के सबसे करीब माना जाता है। वे लोग जो धन-दौलत और भौतिक चीजों का मोह रखते हैं उन्हें एक मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। एकमुखी रुद्राक्ष को शिवजी का ही रूप माना जाता है। जिन लोगों को महालक्ष्मी की कृपा और सभी सुख-सुविधाएं चाहिए उन्हें एकमुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। वैसे यह रुद्राक्ष आसानी से मिलता नहीं है।  रुद्राक्ष धारण करने से पहले ऊँ ह्रीं नम: मंत्र का जाप करना चाहिए। दो मुखी रुद्राक्ष शिव का यह रुद्राक्ष हर इच्छा पूरी करता है। दोमुखी रुद्राक्ष को देवदेवेश्वर कहा गया है। सभी प्रकार की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इसे धारण करना चाहिए। इसे धारण करते समय ॐ नम: का जाप करना चहिए। तीन मुखी रुद्राक्ष व्यक्ति की हर इच्छा को पूरा करने का सबसे तेज माध्यम है तीन मुखी रुद्राक्ष। इसे पहनने से जल्दी से जल्दी इच्छा पूरी होती है। शिवपुराण के अनुसार तीन मुखी रुद्राक्ष कठिन साधाना के बराबर फल देने वाला बताया गया है। जिन लोगों को विद्या प्राप्ति की अभिलाषा है, इसे पहनते समय ऊँ क्लीं नम: का जाप करना चाहिए। चार मुखी रुद्राक्ष इस रुद्राक्ष को ब्र...

विवाह बाधा के वैदिक ज्योतिषीय उपाय

🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸 ज्योतिष के अनुसार कुंडली में कुछ विशेष ग्रह दोषों के प्रभाव से वैवाहिक जीवन पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में उन ग्रहों के उचित ज्योतिषीय उपचार के साथ ही मां पार्वती को प्रतिदिन सिंदूर अर्पित करना चाहिए।  सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। जो भी व्यक्ति नियमित रूप से देवी मां की पूजा करता है उसके जीवन में कभी भी पारिवारिक क्लेश, झगड़े, मानसिक तनाव की स्थिति निर्मित नहीं होती है। सप्तम भाव गत शनि स्थित होने से विवाह बाधक होते है। अतः “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मन्त्र का जप ७६००० एवं ७६०० हवन शमी की लकड़ी, घृत, मधु एवं मिश्री से करवा दें। राहु या केतु होने से विवाह में बाधा या विवाहोपरान्त कलह होता है। यदि राहु के सप्तम स्थान में हो, तो राहु मन्त्र “ॐ रां राहवे नमः” का ७२००० जप तथा दूर्वा, घृत, मधु व मिश्री से दशांश हवन करवा दें। केतु स्थित हो, तो केतु मन्त्र “ॐ कें केतवे नमः” का २८००० जप तथा कुश, घृत, मधु व मिश्री से दशांश हवन करवा दें। सप्तम भावगत सूर्य स्थित होने से पति-पत्नी में अलगाव एवं तलाक पैदा करता है। अतः जातक आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ रविवार से...

वास्तु दोष - घर में चित्र कैसे लगाए

🌹🌹 घरों में तस्वीर या चित्र लगाने से घर सुंदर दिखता है, परंतु बहुत कम ही लोग यह जानते हैं कि घर में लगाए गए चित्र का प्रभाव वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर भी पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में श्रृंगार, हास्य व शांत रस उत्पन्न करने वाली तस्वीरें ही लगाई जानी चाहिए। घर के अन्दर और बाहर सुन्दर चित्र , पेंटिंग , बेल- बूटे , नक्काशी लगाने से ना सिर्फ सुन्दरता बढती है , वास्तु दोष भी दूर होते है। 1- फल-फूल व हंसते हुए बच्चों की तस्वीरें जीवन शक्ति का प्रतीक है। उन्हें पूर्वी व उत्तरी दीवारों पर लगाना शुभ होता है। इनसे जीवन में खुशहाली आती है। 2- लक्ष्मी व कुबेर की तस्वीरें भी उत्तर दिशा में लगानी चाहिए। ऐसा करने से धन लाभ होने की संभावना अधिक होती है। 3- यदि आप पर्वत आदि प्राकृतिक दृश्यों की तस्वीरें लगाना चाहते हैं तो दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगाएं। 4- नदियों-झरनों आदि की तस्वीरें उत्तरी व पूर्वी दिशा में लगाना शुभ होता है। 5- युद्ध प्रसंग, रामायण या महाभारत के युद्ध के चित्र, क्रोध, वैराग्य, डरावना, वीभत्स, दुख की भावना वाला, करुण रस से ओतप्रोत स्त्री,...

इस गुप्त नवरात्र में करें नवार्ण मन्त्र साधना

🌼🙏🏻🌼 *!!!! नवार्ण मन्त्र !!!!* 🌼🙏🏻🌼 माता भगवती जगत् जननी दुर्गा जी की साधना-उपासना के क्रम में, नवार्ण मंत्र एक ऐसा महत्त्वपूर्ण महामंत्र है ! नवार्ण अर्थात नौ अक्षरों का इस नौ अक्षर के महामंत्र में नौ ग्रहों को नियंत्रित करने की शक्ति है ! जिसके माध्यम से सभी क्षेत्रों में पूर्ण सफलता प्राप्त की जा सकती है और मॉ भगवती का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है यह महामंत्र शक्ति साधना में सर्वोपरि तथा सभी मंत्रों- स्तोत्रों में से एक महत्त्वपूर्ण महामंत्र है ! यह माता भगवती दुर्गा जी के तीनों स्वरूपों माता महासरस्वती, माता महालक्ष्मी व माता महाकाली की एक साथ साधना का पूर्ण प्रभावक बीज मंत्र है और साथ ही माता दुर्गा के नौ रूपों का संयुक्त मंत्र है और इसी महामंत्र से नौ ग्रहों को भी शांत किया जा सकता है !!                      *-: नवार्ण मंत्र :-*           *-: “ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै” :-* ✍🏻 नौ अक्षर वाले इस अद्भुत नवार्ण मंत्र में देवी दुर्गा की नौ शक्तियां समायी हुई है ! जिसका सम्बन...

आर्थिक तंगी दूर करने के लिए हनुमानजी की साधना एवं उपाय

शास्त्रों के अनुसार हनुमानजी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवी-देवताओं में से एक हैं। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस के अनुसार माता सीता द्वारा पवनपुत्र हनुमानजी को अमरता का वरदान दिया गया है। इसी वरदान के प्रभाव से इन्हें भी अष्टचिरंजीवी में शामिल किया जाता है। कलयुग में हनुमानजी भक्तों की सभी मनोकामनाएं तुरंत ही पूर्ण करते हैं। बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय बताए गए हैं। इन्हीं उपायों में से एक उपाय यहां बताया जा रहा है। इस उपाय को विधिवत किया जाए तो बहुत जल्दी सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं। यह उपाय पीपल के पत्तों से किया जाता है। श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमानजी की कृपा प्राप्त होते ही भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं। पैसों से जुड़ी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। कोई रोग हो तो वह भी नष्ट हो जाता है। इसके साथ ही यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह दोष हो तो पवनपुत्र की पूजा से वह भी दूर हो जाता है। हनुमानजी की पूजा में पवित्र का पूरा ध्यान रखना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति पैसों की तंगी का सामना करना रहा है तो उसे प्रति मंगलवार और शनिवार को पीपल के 11 पत...

शीघ्र विवाह के अचूक उपाय

वैदिक ज्योतिष में शीघ्र विवाह के उपाय बताए गए हैं। इस लेख में हम शादी में देरी को लेकर आने वाली परेशानी और उनके समाधानों की बात कर रहे हैं। शीघ्र विवाह और सही समय पर शादी हर युवक-युवती की इच्छा होती है। विवाह में देरी होने से नौजवानों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विवाह में आने वाली परेशानियों की ज्योतिष शास्त्र में कई वजह बताई जाती हैं। इनमें मांगलिक दोष, बृहस्पति और शुक्र ग्रह की खराब स्थिति आदि वजह प्रमुख हैं। यदि किसी भी युवक और कन्या की कुंडली में ऐसे दोष हैं तो विवाह में देरी या शादी के बाद परेशानी उत्पन्न होने की संभावना बनी रहती है। हिंदू धर्म और ज्योतिष विद्या में शीघ्र विवाह के सरल उपाय मौजूद हैं। व्रत, तंत्र-मंत्र, टोटके जैसे तमाम ज्योतिष और धार्मिक उपायों से विवाह में आ रही मुश्किलों को दूर किया जा सकता है। आइये जानते हैं शीघ्र विवाह के सरल उपाय। विवाह में बाधा आने के कारण अक्सर जातकों की कुंडली में ऐसे योग भी होते हैं जिससे उनकी शादी में बाधाएँ आती है और लाख कोशिश करने के बावजूद वे शादी की ख़ुशी से वंचित रह जाते हैं इसलिए जिस प्रकार एक चिकित्सक के लिए किसी...

हनुमान चालीसा में छिपे मैनेजमेंट के सूत्र

कई लोगों की दिनचर्या हनुमान चालीसा पढ़ने से शुरू होती है। पर क्या आप जानते हैं कि श्री *हनुमान चालीसा* में 40 चौपाइयां हैं, ये उस क्रम में लिखी गई हैं जो एक आम आदमी की जिंदगी का क्रम होता है। माना जाता है तुलसीदास ने चालीसा की रचना मानस से पूर्व किया था। हनुमान को गुरु बनाकर उन्होंने राम को पाने की शुरुआत की। अगर आप सिर्फ हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं तो यह आपको भीतरी शक्ति तो दे रही है लेकिन अगर आप इसके अर्थ में छिपे जिंदगी  के सूत्र समझ लें तो आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिला सकते हैं। हनुमान चालीसा सनातन परंपरा में लिखी गई पहली चालीसा है शेष सभी चालीसाएं इसके बाद ही लिखी गई। हनुमान चालीसा की शुरुआत से अंत तक सफलता के कई सूत्र हैं। आइए जानते हैं हनुमान चालीसा से आप अपने जीवन में क्या-क्या बदलाव ला सकते हैं…. *शुरुआत गुरु से…* हनुमान चालीसा की शुरुआत *गुरु* से हुई है… श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। *अर्थ* - अपने गुरु के चरणों की धूल से अपने मन के दर्पण को साफ करता हूं। गुरु का महत्व चालीसा की पहले दोहे की पहली लाइन में लिखा गया है। जीवन में गुरु...

ललाट की रेखाएं

हाथ की रेखाओं के अतिरिक्त आपके मस्तक की रेखाएं भी बहुत कुछ बोलती हैं। यह बात अलग है कि सामान्य तौर पर इन्हें नजर अंदाज कर दिया जाता है। अगर हाथ की रेखाओं के साथ मस्तिष्क(ललाट) रेखाओं का भी अध्ययन कर लिया जाए तो भविष्य जानने में और भी आसानी रहती है,तथा प्रामाणिकता भी असंदिग्ध रहती है। इसकी पहचान निम्न प्रकार से है। 1- ललाट में बालों के नीचे जो पहली रेखा है वह शनि रेखा है। 2-इसके नीचे वाली रेखा गुरु रेखा है। 3-तीसरी रेखा मंगल रेखा है। 4- चौथी रेखा का स्वामी सूर्य है जो मान-सम्मान और यश प्रदान करता है। 5-मस्तक की पांचवीं रेखा का स्वामी शुक्र है जो आपको जीवन के सारे सुख उपलब्ध कराता है। 6- छठी रेखा के स्वामी बुध हैं। 7- सातवीं रेखा जो इन सबके नीचे है ,वह चंद्र का स्थान है। इन रेखाओं के अतिरिक्त दाहिने नेत्र के ऊपरी भाग में उठी हुई एक छोटी सी रेखा सूर्य रेखा कही जाती है और बाईं तरफ ऐसी ही रेखा चंद्र रेखा कही जाती है। शनि रेखा- यदि शनि रेखा सीधी हो तो व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अगर यह टेढ़ी-मेढ़ी हो तो चिड़चिड़े स्वभाव का होता है। गुरु रेखा-यदि यह सीधी हो तो जातक ईमानदार होता है...

घर में समृद्धि

॰ घर में समृद्धि लाने हेतु घर के उत्तरपश्चिम के कोण (वायव्य कोण) में सुन्दर से मिट्टी के बर्तन में कुछ सोने-चांदी के सिक्के, लाल कपड़े में बांध कर रखें। फिर बर्तन को गेहूं या चावल से भर दें। ऐसा करने से घर में धन का अभाव नहीं रहेगा। ॰ घर में स्थायी सुख-समृद्धि हेतु पीपल के वृक्ष की छाया में खड़े रह कर लोहे के बर्तन में जल, चीनी, घी तथा दूध मिला कर पीपल के वृक्ष की जड़ में डालने से घर में लम्बे समय तक सुख-समृद्धि रहती है और लक्ष्मी का वास होता है। ॰ घर में बार-बार धन हानि हो रही हो तों वीरवार को घर के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़क कर गुलाल पर शुद्ध घी का दोमुखी (दो मुख वाला) दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय मन ही मन यह कामना करनी चाहिए की भविष्य में घर में धन हानि का सामना न करना पड़े´। जब दीपक शांत हो जाए तो उसे बहते हुए पानी में बहा देना चाहिए।

सूर्य तप्त जल और उसके रंगों से चिकत्सा (क्रोमोथैरेपी )

क्रोमोथैरेपी रोम की एक प्रचीन चिकित्सा पद्धति है। क्रोमो का अर्थ होता है रंग और पैथी का अर्थ है- चिकित्सा पद्धति यानि रंगों पर आधारित चिकित्सा जिसमें बीमारियों का पता लगाकर उससे सम्बन्धित रंगों का प्रकाश दिया जाता है। उर्जा के प्रमुख संचालक सूर्य के प्रकाश में सात प्रकार के रंग मौजूद होते है।  1-लाल, 2- पीला, 3-हरा, 4-नीला, 5-आसमानी, 6-बैंगनी,7-नारंगी इस पद्धति में सूर्य के प्रकाश में सात प्रकार के रंगों को शरीर के विभिन्न अवयव ग्रहण करते हैं। जिससे शरीर में रंगों का संतुलन बना रहता है, और यह संतुलन बिगड़ते ही शरीर रोगों की चपेट में आ जाता है। इस प्रचीन चिकित्सा पद्धति में बीमारियों के लक्षणों का पता लगाकर उससे सम्बन्धित रंगों का प्रकाश देकर शरीर के विकारों को दूर किया जाता है। इसमें बीमारी के अनुसार उससे सम्बन्धित रंग का जल सेवन करना पड़ता है। एक साफ कांच की बोतल में पानी भरकर उसके चारों ओर विशेष रंग का कागज लपेट दिया जाता है, तत्पश्चात आठ-आठ घन्टे इस बोतल को धूप में रखकर रोगी को 7 दिनों तक एक-एक कप सुबह व शाम जल पिलाया जाता है। सूर्य की किरणों में मौजूद सात रंगों का प्रयोग ...

लघुरुद्राभिषेक

लघुरुद्राभिषेक तांबेका लोटा लेकर उसमें शुध्ध पानी, दूध, चोखा (चावल), बिल्व पत्र, दुर्वा, सफेद तिल, मिलाकर शिवलिंग उपर धृतधारा चालु रखके निम्नोक्त लघुरुद्राभिषेक का पठन ग्यारा बार श्रध्धापूर्वक करने से जीवन में आयी हुई और आनेवाली आधि, व्याधि और उपाधि से छुटकारा मिलता है और सुख शांति प्राप्त होती है । ॐ सर्वदेवेभ्यो नम : ॐ नमो भवाय शर्वाय रुद्राय वरदाय च । पशूनां पतये नित्यमुग्राय च कपर्दिने ॥1॥ महादेवाय भीमाय त्र्यम्बकाय च शान्तये । ईशानाय मखघ्नाय नमोऽस्त्वन्धकघातिने ॥2॥ कुमारगुरवे तुभ्यं नीलग्रीवाय वेधसे । पिनाकिने हिवष्याय सत्याय विभवे सदा ॥3॥ विलोहिताय धूम्राय व्याधायानपराजिते । नित्यनीलिशखण्डाय शूलिने दिव्यचक्षुषे ॥4॥ हन्त्रे गोप्त्रे त्रिनेत्राय व्याधाय वसुरेतसे । अचिन्त्यायाम्बिकाभर्त्रे सर्वदेवस्तुताय च ॥5॥ वृषध्वजाय मुण्डाय जिटने ब्रह्मचारिणे । तप्यमानाय सिलले ब्रह्मण्यायाजिताय च ॥6॥ विश्वात्मने विश्वसृजे विश्वमावृत्य तिष्ठते । नमो नमस्ते सेव्याय भूतानां प्रभवे सदा ॥7॥ ब्रह्मवक्त्राय सर्वाय शंकराय शिवाय च । नमोऽस्तु वाचस्पतये प्रजानां पतये नम: ॥8॥ नमो विश्वस्य पतये म...

कुंडली का पहला भाव यानी लग्न

मित्रों जन्म कुंडली विश्लेष्ण में यदि किसी का सबसे ज्यादा महत्व है तो वो लग्न का है हालांकि अन्य भाव और वर्ग कुंडलियों का भी अपनी अपनी जगह महत्व है लेकिन जब तक लग्न और लग्नेश की सिथ्थी सही नही हो अच्छे से अच्छा योग भी अपना पूर्ण प्रभाव नही दे पाता है| वैसे तो और भाव किसी न किसी अंग को दर्शाता है लेकिन लग्न हमारे पुरे शरीर को दर्शाता है | लग्न से किसी इंसान के व्यव्क्तित्व का पता चलता है समाज में जातक का नाम किस हशिय्त का होगा जातक कितना परोपकारी होगा हालांकि ये भाव 25% ही परोपकारी दर्शाता है बाकी ७५% परोपकार का नवम भाव से पता चलता है| ये भाव हमारे जीवन के पहले भाग यानी 25 वर्ष तक की उम्र को विशेष रूप से दर्शाता है जातक अपने पुराने रिति रिवाजों पर कितना चलताहै उसका इस भाव से पता चलता है| हम पिछले जन्म के कर्मों का कितना भाग इस जन्म में लेकर आये है और उनका कितना फल हमे मिलना है वो इसी भाव से पता चलता है| पहला भाव पूर्व दिशा को दर्शाता है इसिलिय जिस जातक का सूर्य पहले भाव में हो या बहुत अच्छी सिथ्ती में हो उसे पूर्व दिशा का मकान शुभ फल देता है| इसी भाव के द्वारा हमारा वर्तमान कैसा ब...

कुंडली में दुसरा भाव

मित्रों ज्योतिष  में दुसरे भाव  को एक महत्वपूर्ण  स्थान  दिया गया  है  |  ये  सबसे  मुख्य  बात की हमारे  कुटुंब  परिवार  को  दर्शाता   है ,हमारे  द्वारा  किये  जाने  वाले  संचित  धन  और  परिवार  से मिलने  वाले  धन  को ये  भाव  दर्शाता है इसिलिय  सोने  चांदी  का  सम्बन्ध इसी भाव  से  मना  गया  है  | हमारे शरीर में ये  दाई आँख  चेहरे  और  गले  को  दर्शाता  है  |  इस  भाव  को  वाणी  भाव  भी कहा  जाता  है  इसिलिय  हमारी  वाणी  मीठी होगी  या नही  और  गायन  छेत्र  में हमे  कैसी  सफलता  मिल  सकती  है  वो  इसी  भाव  पर  निर्भर  करता  है   \  हमारी  वाणी  का प्रभावशाली  होना  भी  इसी   भ...

चोथा भाव और हमारी कुंडली

मित्रों  आज  कुंडली  के  एक  अहम  भाव   के  बारे  में  लिख  रहा  हूँ | आज के इन्सान  की  सबसे  मुख्य  समस्या  यदि  कोई  है  तो   मानसिक  सुख  ग्रहस्थ  सुख  मकान  वाहन आदि  के   सुख  की   है जातक  को  इनमे  से किसी  न  किसी  समस्या  का सामना अक्सर   करना पड़ता   है  और  ये  सभी  चीजें  चोथे  भाव  से देखि   जाती  है | चोथे भाव  में  अशुभ   ग्रह  होने  पर  जातक  की  मन  की  शान्ति  पर बहुत बुरा प्रभाव  पड़ता है यानी जातक  के  पास  कई  बार  सब कुछ  होते  हुवे  भी कुछ  पास में  न  होने  का अहसास  होता  है  |  जीवन  में विघ्न  आते  रहते है | जातक  का  मन  मुरझाये  हुवे   फुल  ...

पंचम भाव

मित्रों भाव  के  सम्बन्ध  में आज  हम  पंचम  भाव  से  क्या  क्या  देखते  है  उस  पर  कुछ  लिख  रहा  हूँ  | पंचम  भाव  कुंडली  के  मुख्य  भावों में स्थान  प्राप्त  है  क्योंकि इसकी  गिनती त्रिकोण में होती  है |पंचम  भाव  से  मुख्य  रूप  से  सन्तान  विद्या  बुद्धि को  देखा  जाता  है  \ ये  हमारी  समझ  का  भाव  होता  है  की  हमारी  समझ  कैसी  है  हम  अपनी  बुद्धि  का किस  प्रकार  से कितना  प्रयोग करते  है  | मानसिक  तौर पर  हमारी  चेतनता  कितनी  है  , हमारे  मन   में इमानदारी किस हद  तक  है  , जमाने  में हमारा  नाम  मान कैसा  है  यानी की समाज में हमारा  मान  सम्मान कैसा  है  उसका  पता  भ...

छटा भाव

मित्रों  आज की  भागमभाग  की  जिन्दगी  में   इंसान  की  जो  सबसे  बड़ी  समस्या  होती  है   वो  ऋण   रोग  शत्रु  मुख्य  रूप  से   होते  है  और  यदि   इंसान  इनसे  बचा  रहता  है  तो   उसे हम   एक   सुखी  इंसान  की  संज्ञा   दे  सकते  है  और  इन  सभी  चीजो  को  जो   भाव   कुंडली  में  दर्शाता  है  वो  छटा   भाव  होता  है | छटा  भाव हमारे  आंतरिक  मन  के  साथ  साथ बाहरी  शरीर  को  भी  दर्शता  है  | छटा  भाव   हमारे  मानसिक  संताप , दुश्मनी  , बिमारी ,ननिहाल , नौकरी , रखैल , भुत बाधा , पेट पाचन   शक्ति , कर्ज  और फौजदारी  मुकदमे   का  कारक  भाव  है | यदि  इस  भाव  में  कोई   ग्र...