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तांत्रिक उपाय, कुछ ही दिनों में हो जाएंगे मालामाल

यदि आप पैसों की तंगी से परेशान हैं और ईमानदारी से मेहनत करने के बाद भी फल नहीं मिल रहा है तो किसी भी सोमवार को यह उपाय करें।उपाय के अनुसार सोमवार की रात जब चंद्रोदय हो जाए तो उसके बाद अपने पलंग के चारों कोनों में चांदी की कील ठोक दें। चांदी की कील छोटी- छोटी भी लगाई जा सकती है। यह एक चमत्कारी तांत्रिक उपाय है और इससे आपके घर के आसपास की नकारात्मक ऊर्जा भी नष्ट हो जाती है। पैसों की समस्याएं दूर होने लगती हैं यदि कड़ी मेहनत के बाद भी आपकी पैसों की कमी दूर नहीं हो रही है या आप और अधिक पैसा कमाना चाहते हैं तो यहां कुछ तांत्रिक उपाय बताए जा रहे हैं। इन उपायों को करने पर पैसों की तंगी दूर हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि तंत्र शास्त्र के उपाय बहुत जल्दी असर दिखाना शुरू कर देते हैं मालामाल होने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति बुधवार को यह तांत्रिक उपाय करें। उपाय के अनुसार बुधवार के दिन सात साबूत कौडिय़ां लें। कौडिय़ां बाजार में पूजन सामग्री की दुकानों पर आसानी से मिल जाती है। इसके साथ ही एक मुट्ठी हरे खड़े मूंग लें। दोनों को एक हरे कपड़े में बांध लें और किसी मंदिर की सीढिय़ों पर चुपचाप रख आएं। ...

मोर-पंख - आयुर्वेद, वास्तु और ज्योतिष में मोर के पंख का उपयोग :

प्राचीन काल से ही नजर उतारने व भगवान की प्रतिमा के आगे वातावरण को पवित्र करने के लिए भी मोर पंख का ही प्रयोग होता आया है. मोर पंख का उपयोग वशीकरण, कार्यसिद्धि, भूत बाधा, रोग मुक्ति, ग्रह वाधा, वास्तुदोष निग्रह आदि में महत्पूर्ण माना गया हैं, इसे सर पर धारण करने से विद्या लाभ मिलता है या सरस्वती माता के उपासक और विद्यार्थी पुस्तकों के मध्य अभिमंत्रित मोर पंख रख कर लाभ उठा सकते हैं. मंत्र सिद्धि के लिए जपने वाली माला को मोर पंखों के बीच रखा जाता हैं. घर में अलग अलग स्थान पर मोर पंख रखने से घर का वास्तु बदला जा सकता है. नव ग्रहों की दशा से बचने के लिए भी होता है मोर पंख का प्रयोग. कक्ष में मोर पंख वातावरण को सकारात्मक बनाने में लाभदायक होता है. ग्रहों को शांत करने में मोर पंख आपकी सहायता कर सकता है। आयुर्वेद में भी मोर के पंख से तपेदिक, दमा, लकवा, नजला तथा बांझपन जैसे रोगों का सफलतापूर्वक उपचार संभव होता हैयही मोर का पंख हमारे ज्योतिष.शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र के द्वारा मनुष्य जीवन में ाग्यशाली सिद्ध होता है - एक मोर का पंख हमारे जीवन कि दिशा बदलने में सहायक है। १ – घर के दक्षिण-पूर्व ...

कुंडली बताती है कि क्या रत्न पहने और क्या ना पहने

रत्न सबके लिए नहीं होते, वे सुंदरता की वस्तु न होकर प्राणवान ऊर्जा के स्रोत के रूप में कार्य करते हैं। शुभ रत्नों का चयन करने के लिए अपने जन्म कुंडली में शुभ ग्रहों और लग्न की राशि के अनुसार करना चाहिए, अन्यथा प्रतिकूल रत्न लाभ के बजाय हानि भी कर सकता है। कई रत्न बड़े प्रभावशाली होते हैं और वे अपना प्रभाव तुरंत दिखाते है। रत्न पहनने के लिए दशा-महादशाओं का अध्ययन भी जरूरी है। केंद्र या त्रिकोण के स्वामी की ग्रह महादशा में उस ग्रह का रत्न पहनने से अधिक लाभ मिलता है। जन्म कुंडली में त्रिकोण सदैव शुभ होता है इसलिए लग्नेश, पंचमेश व नवमेश का रत्न धारण किया जा सकता है। यदि इन तीनों में कोई ग्रह अपनी उच्च राशि या स्वराशि में हो तो रत्न धारण नहीं करना चाहिए। यदि शुभ ग्रह अस्त या निर्बल हो तो उसका रत्न पहनें ताकि उस ग्रह के प्रभाव को बढ़ाकर शुभ फल दे। यदि लग्न कमजोर है या लग्नेश अस्त है तो लग्नेश का रत्न पहनें। यदि भाग्येश निर्बल या अस्त है तो भाग्येश का रत्न पहनें। लग्नेश का रत्न जीवन-रत्न, पंचमेश का कारक-रत्न और नवमेश का भाग्य-रत्न कहलाता है। त्रिकोण का स्वामी यदि नीच का है, तो वह रत्न न पहने...

ज्योतिष: ग्रह और रोग :Astrology: Planets and diseases​.

ग्रह और रोग *****अगर ग्रह पीड़ित हो खराब युति मे हो 6 ;8;12भाव या अन्य किसी भाव मे खराब हो या शनि राहू केतु युति या द्रस्तिगत प्रभावित हो तो व्यक्ति निम्न रोगों से ग्रस्त होता हैं *** प्रत्येक ग्रह हमारे शरीर पर प्रभाव डालते है। जिससे की हमे बीमारियों का सामना करना पड़ता है।नीचे हम बता रहे है कि कौनसा ग्रह कौनसा रोग. दे सकता है। **सूर्य और रोग: विवेक : विवेक खोना । दिमाग : दिमाग और शरीर का दायां भाग सूर्य से प्रभावित होकर रोग देता है। अकड़न :सूर्य के कारण खराब होने पर शरीर में अकड़न आ सकती है। थूक का आना :मुंह में थूक आते रहता है। दिल का रोग :दिल के रोग का होना। धड़कन :धड़कन का कम-ज्यादा होते रहना । दांतों : दांतों में तकलीफ का होना। बेहोशी और सिरदर्द :का रोग होना । **चंद्र ग्रह और रोग : दिल और बायां भाग : दिल और बायां भाग मे चंद्र ग्रह का प्रभाव होने से रोग देता है। रोग : सर्दी-जुकाम ,मिर्गी ,पागलपन, बेहोशी ,मासिक धर्म ,फेफड़े संबंधी रोगो का होना। मासिक धर्म :मासिक धर्म ठीक से न होना। स्मरण शक्ति कमजोर होना, मानसिक तनाव और मन में घबराहट होना, शंका और अनिश्चित भय का ...

नवग्रह शाबर मन्त्र

रविदेव हवन - हवन सामग्रीः- गौघृत तथा अर्क की लकड़ी । दिशाः- पूर्व, मुद्रा-हंसी, संख्याः- ९ बार या १०८ बार । मन्त्रः- “सत नमो आदेश । गुरुजी को आदेश । ॐ गुरुजी । सुन बा योग मूल कहे बारी बार । सतगुरु का सहज विचार ।। ॐ आदित्य खोजो आवागमन घट में राखो दृढ़ करो मन ।। पवन जो खोजो दसवें द्वार । तब गुरु पावे आदित्य देवा ।। आदित्य ग्रह जाति का क्षत्रिय । रक्त रंजित कश्यप पंथ ।। कलिंग देश स्थापना थाप लो । लो पूजा करो सूर्य नारायण की । सत फुरै सत वाचा फुरै श्रीनाथजी के सिंहासन ऊपर पान फूल की पूजा चढ़ै । हमारे आसन पर ऋद्धि-सिद्धि धरै, भण्डार भरे । ७ वार, २७ नक्षत्र, ९ ग्रह, १२ राशि, १५ तिथि । सोम-मंगल शुक्र शनि । बुध-गुरु-राहु-केतु सुख करै, दुःख हरै । खाली वाचा कभी ना पड़ै ।। ॐ सूर्य मन्त्र गायत्री जाप । रक्षा करे श्री शम्भुजती गुरु गोरखनाथ । नमो नमः स्वाहा ।” सोमदेव हवन - हवन सामग्रीः- गौघृत तथा पलाश की लकड़ी । दिशाः- पूर्व, मुद्रा-हंसी, संख्याः- ९ बार या १०८ बार । मन्त्रः- “ॐ गुरुजी, सोमदेव मन धरी बा शून्य । निर्मल काया पाप न पुण्य ।। शशी-हर बरसे अम्बर झरे । सोमदेव गुण येता करें । सोमदेव ज...

पुराणों में लिखे उपाय से करें अपनी गरीबी का नाश

दरिद्रतानाशक सूक्त दरिद्रता (गरीबी) का यहां तक महत्व है कि अति प्राचीन परम पवित्र ऋग्वेद तक में उसके निवारण के लिए एक सूक्त पाया जाता है जो निम्र प्रकार है : अरायि काणे विकटे गिरिं गच्छ सदन्वे। शिरिन्विठस्य सत्वभिस्तेभिष्ट्रवा चातयामासि।। चत्तो इतश्चत्तामुत: सर्वा भ्रूणान्यारुषी। अराय्यं ब्रह्मणस्पते तीक्ष्ण-शृडगोदषन्निहि। अदो यद्दारु प्लवते सिन्धो पारे अपूरूषम्। तदा रभस्व दुर्हणो तेन गच्छ परस्तरम्।। यद्ध प्राचीरजगन्तोरो मंडूर-धाणिको:। हत इंद्रस्य शत्रव: सर्वे बुद्बुदयाशव:।। ‘‘दरिद्रते! तुम दान विरोधिनी, कुशब्द वाली, विकट आकार वाली और क्रोधिनी हो। मैं (शिरिन्विठ) ऐसा उपाय करता हूं, जिससे तुम्हें दूर करूंगा। दरिद्रता वृक्ष, लता, शस्य आदि का अंकुर नष्ट करके दुॢभक्ष ले आती है। उसे मैं इस लोक और उस लोक से दूर करता हूं। तेजशाली ब्रह्मणस्पति! दान- द्रोहिणी इस दरिद्रता को यहां से दूर कर आओ। यह जो काष्ठ समुद्र-तट के पास बहता है, उसका कोई कर्ता (स्वामी) नहीं है। विकृत आकृति वाली अलक्ष्मी (दरिद्रता)! इसी के ऊपर चढ़कर समुद्र के दूसरी ओर चली जाओ। हिंसामयी और कुत्सित शब्द वाली अलक्ष्मियो...

घर किराए का हो या खुद का, ध्यान रखें ये जरूरी छोटी-छोटी

क्या आप जानते हैं, प्रत्येक व्यक्ति का अपना एक अलग आभामंडल होता है। आभामंडल का अर्थ है हमारे शरीर के आसपास रहने वाली अदृश्य ऊर्जा। यही ऊर्जा समाज और घर-परिवार में हमारी अच्छी बुरी छबि निर्मित करती है। जिस प्रकार इंसान का आभामंडल होता है, ठीक उसी प्रकार हमारे घर का भी आभामंडल होता है। यदि आपके घर का आभामंडल विकसित और शुभ होगा तो वह आपको भाग्यशाली बना सकता है। घर का आभामंडल तभी विकसित हो सकता है, जब वहां पूरी तरह सकारात्मक ऊर्जा रहती है। यदि घर में नकारात्मक ऊर्जा रहेगी तो आभामंडल भी बुरा असर दिखा सकता है। इसी वजह से घर में ऐसी बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे घर के आभामंडल से हमें भी सही ऊर्जा मिलती रहे। यदि घर में कोई वास्तु दोष होता है तो नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। घर का निर्माण होते समय ही यदि वास्तु दोष रह जाए तो उसे दूर करने के लिए घर में तोड़-फोड़ की जाती है। जो लोग घर के मालिक हैं, वे तो आसानी से तोड़-फोड़ करके वास्तु दोष दूर कर सकते हैं। जबकि जो लोग किराएदार हैं, वे घर में तोड़-फोड़ नहीं कर सकते हैं। ऐसी परिस्थिति में यहां दी जा रही कुछ बातों का ध्यान रखेंगे तो आपके घर का वास्...