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Vastu kismat

यूं तो किसी को किस्मत से ज्यादा नहीं मिलता लेकिन कई बार अनेक बाधाओं के कारण किस्मत में लिखी धन-समृद्धि भी प्राप्त नहीं होती। वास्तु को मानने वाले अगर इसके मुताबिक काम करें तो उन्हें वो मिल सकता है जो अब तक नहीं मिला है। - पूर्व दिशा : यहां घर की संपत्ति और तिजोरी रखना बहुत शुभ होता है और उसमें बढ़ोतरी होती रहती है। - पश्चिम दिशा : यहां धन-संपत्ति और आभूषण रखे जाएं तो साधारण ही शुभता का लाभ मिलता है। परंतु घर का मुखिया अपने स्त्री-पुरुष मित्रों का सहयोग होने के बाद भी बड़ी कठिनाई के साथ धन कमा पाता है। - उत्तर दिशा : घर की इस दिशा में कैश व आभूषण जिस अलमारी में रखते हैं, वह अलमारी भवन की उत्तर दिशा के कमरे में दक्षिण की दीवार से लगाकर रखना चाहिए। इस प्रकार रखने से अलमारी उत्तर दिशा की ओर खुलेगी, उसमें रखे गए पैसे और आभूषण में हमेशा वृद्धि होती रहेगी। - दक्षिण दिशा : इस दिशा में धन, सोना, चाँदी और आभूषण रखने से नुकसान तो नहीं होता परंतु बढ़ोत्तरी भी विशेष नहीं होती है। - ईशान कोण : यहां पैसा, धन और आभूषण रखे जाएं तो यह दर्शाता है कि घर का मुखिया बुद्धिमान है और यदि यह उत्तर ईशान ...

Vastu tips

1. रसोई बनाने से पहले वास्तु के अनुसार आदर्श स्थान दक्षिण-पूर्व कोना (आग्रेय कोण) होता है। दूसरे स्थान के रूप में उत्तर-पश्चिम या वायव्य कोण में भी रसोई का निर्माण किया जाए तो अच्छा रहता है। 2.दक्षिण, पश्चिम, उत्तर, ईशान कोण एवं नैऋत्य कोण रसोई के लिए वर्जित होते हैं। 3. रसोई में गैस सिलैंडर और चूल्हा स्थापन इस प्रकार होना चाहिए कि खाना बनाने वाले का चेहरा पूर्व की तरफ हो। साथ ही प्लेटफार्म उत्तर एवं पूर्व की दीवार में एकदम न लगता हों। 4.जल और अग्रि साथ-साथ न हों इसके लिए बर्तन धोने का सिंक और पानी के नल चूल्हे से दूर होने चाहिएं। 5. रसोई घर में अवन इत्यादि बिजली उपकरण अग्रि कोण में होने चाहिएं। 6. फ्रिज दक्षिण-पश्चिम में तथा एग्जॉस्ट फैन ईशान कोण में होना चाहिए। 7. गैस चूल्हे के ऊपर सामान रखने के लिए अलमारियों का निर्माण नहीं करवाना चाहिए। हवा का आवागमन सुगमता से हो सके, इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। 8.रसोई घर की दीवार से सटा कर, इसके ऊपर या नीचे टॉयलैट नहीं होना चाहिए। 9. रसोई घर के एकदम मध्य में बैठकर कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए साथ ही रसोई घर का चूल्हा बाहर बैठे व्यक्ति को ...

नजर उतारने के उपाय

नजर उतारने के उपाय १॰ बच्चे ने दूध पीना या खाना छोड़ दिया हो, तो रोटी या दूध को बच्चे पर से ‘आठ’ बार उतार के कुत्ते या गाय को खिला दें। २॰ नमक, राई के दाने, पीली सरसों, मिर्च, पुरानी झाडू का एक टुकड़ा लेकर ‘नजर’ लगे व्यक्ति पर से ‘आठ’ बार उतार कर अग्नि में जला दें। ‘नजर’ लगी होगी, तो मिर्चों की धांस नहीँ आयेगी। ३॰ जिस व्यक्ति पर शंका हो, उसे बुलाकर ‘नजर’ लगे व्यक्ति पर उससे हाथ फिरवाने से लाभ होता है। ४॰ पश्चिमी देशों में नजर लगने की आशंका के चलते ‘टच वुड’ कहकर लकड़ी के फर्नीचर को छू लेता है। ऐसी मान्यता है कि उसे नजर नहीं लगेगी। ५॰ गिरजाघर से पवित्र-जल लाकर पिलाने का भी चलन है। ६॰ इस्लाम धर्म के अनुसार ‘नजर’ वाले पर से ‘अण्डा’ या ‘जानवर की कलेजी’ उतार के ‘बीच चौराहे’ पर रख दें। दरगाह या कब्र से फूल और अगर-बत्ती की राख लाकर ‘नजर’ वाले के सिरहाने रख दें यानी में भी डाल दें। ११॰ थोड़ी सी राई, नमक, आटा या चोकर और ३, ५ या ७ लाल सूखी मिर्च लेकर, जिसे ‘नजर’ लगी हो, उसके सिर पर सात बार घुमाकर आग में डाल दें। ‘नजर’-दोष होने पर मिर्च जलने की गन्ध नहीं आती। १२॰ पुराने कपड़े की सात चिन्द...

चश्मा हटाने के लिए

चश्मा हटाने के लिए विनियोगः- हथेली में जल लेकर निम्न विनियोग मन्त्र बोलें तथा जल धरती पर गिरा देवें।ॐ अस्याश्चाक्षुषी विधाया अर्हिबुर्धन्य ऋषि । गायत्री छन्द । सूर्यो देवता । चक्षुरोगनिवृतये जपे विनियोगा । पाठः- फिर निम्न पाठ करें ॐ चक्षुः चक्षुः तेज स्थिरो भव । मां पाहि पाहि । चक्षु रोगान शमय शमय । मम जातरूपं तेजो दर्शय दर्शय यथा अह अन्धो न स्यां तथा कल्पय कल्पय । कल्याणं कुरू कुरू याति मम पूर्वजन्मोपार्जितानी चक्षु प्रतिरोधक दुष्कृतानि सर्वाणी निर्मूल्य निर्मूल्य । ॐ मम चक्षुस्तेजोदात्रे दिव्याय भास्कराय । ॐ नम करूणाकराय अमृताय ॐ नमः सूर्याय ॐ नम भगवते सूर्याक्षि तेजसे नमः।खेचराय नमः । महते नमः । रजसे नमः । तमसे नमः । असतो मा सदगम्य तमसो मा ज्योर्तिगम्य ।मृत्र्यो मा अमृतं गमय ।उष्णो भगवांछुचिरूपः हसांे भगवान शुचिप्रति-प्रतिरूप । य इमां चाक्षुष्मति विधां ब्राहमणो नित्यमधीते न तस्याक्षिरोगो भवति न तस्य कुले अन्धो भवति । अष्टौ ब्राहमणान सम्यग ग्राहयित्वा विधा सिद्धिर्भवति।ॐ नमो भगवते आदित्याय अहोवाहिनी अहोवाहिनी स्वाहा।

क्या आप दीपावली ( Dipawali) को दीपक जलाने का रहस्य जानते हैं?

क्या आप दीपावली ( Dipawali) को दीपक जलाने का रहस्य जानते हैं? क्या आप जानते हैं कि दीपावली को लक्ष्मी प्राप्ति व ऋण मुक्ति से क्यों जोडा गया है क्या आप दीपावली मनाते हैं उसके बाद भी आप अगली दीपावली तक लक्ष्मीवान नहीं बन पाते? तो यह आलेख आपके लिये है। दरअसल दीपावली अमावस्या के दिन आती है जो शनि का दिन होता है हमारे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह की उच्च स्थिती व उनकी कृपा से ही मनुष्य धनवान होता है व मकान बनवा पाता है।इसलिये दीपावली को जो तिल के तेल के दीपक जलाने का रिवाज है वो तेल अमावस्या होने से शनि ग्रह की दशा ठीक करने के लिये जलाया जाता है। क्या आप दीपावली को मोमबतियां जलाते हैं? दीपावली को सरसों के तेल के दीपक जलाते हैं? सिर्फ इलैक्ट्रोनिक लाईटें लगाते हैं सोचते हैं दीपकों के झंझट में कौन पड़े? तो आप गलत कर रहें हैं दीपावली को कम से कम सवा लीटर तिल के तेल के दीपक जलाने से मनुष्य पर चल रही शनि की दशा उतर जाती है तथा वो धनवान व ऋणमुक्त बनता है उसे व्यापार धन्धे में फायदा होता है घर में फिजुलखर्च नहीं होते।  ( Shani shadna to attract money and wealth) चलिये अबके दीपा...

मंत्र-महिमा

मंत्र-महिमा मन की मनन करने की शक्ति अर्थात एकाग्रता प्रदान करके जप द्वारा सभी भयों का विनाश करके, पूर्ण रूप से रक्षा करनेवाले शब्दों को मंत्र कहा जाता है। ऐसे कुछ मंत्र और उनकी शक्ति निम्न प्रकार हैः 1.हरिॐ ह्रीं शब्द बोलने से यकृत पर गहरा प्रभाव पड़ता है और हरि के साथ यदि ॐमिला कर उच्चारण किया जाए तो हमारी पाँचों ज्ञानेन्द्रियों पर अच्छी असर पड़ती है। सात बार हरि ॐ का गुंजन करने से मूलाधार केन्द्र पर स्पंदन होते हैं और कई रोगों को कीटाणु भाग जाते हैं। 2.रामः रमन्ते योगीनः यस्मिन् स रामः। जिसमें योगी लोग रमण करते हैं वह है राम। रोम रोम में जो चैतन्य आत्मा है वह है राम। ॐ राम... ॐ राम... का हररोज एक घण्टे तक जप करने से रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ती है, मन पवित्र होता है, निराशा, हताशा और मानसिक दुर्बलता दूर होने से शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त होता है। 3.सूर्यमंत्रः ॐ सूर्याय नमः। इस मँत्र के जप से स्वास्थ्य, दीर्घायु, वीर्य एवं ओज की प्राप्ति होती है। यह मंत्र शरीर एवं चक्षु के सारे रोग दूर करता है। इस मंत्र के जप करने से जापक के शत्रु उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते। 4.सारस्वत्य मंत्रः...

जन्म तारीख के आधार पर रुद्राक्ष धारण करना बता रहे हैं

जन्म तारीख के आधार पर रुद्राक्ष धारण करना बता रहे हैं जन्मांको का महत्व जिस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में व्याप्त है उसी तरह भक्ति आराधना के क्षेत्र में भी इनका अपना एक विशिष्ट स्थान है | रुद्राक्ष योग ,भोग व मोक्ष के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मने गये है | रुद्राक्ष धारण के आधार बतलाये गये है ,यहाँ जन्मांको के आधार पर रुद्राक्ष धारण प्रस्तुत है | शक्ति एवं सुख –समृद्धि की कामना हेतु भक्ति आराधना की सफलता में जन्मांकों के आधार पर रुद्राक्ष धारण कल्याणकारी हो सकता है | जन्मांक -1 वाले व्यक्तियों को एक मुखी ,तीन मुखी ,ग्यारह मुखी तथा चौदह मुखी रुद्राक्ष माला धारण लाभप्रद रहती है | यह रुद्राक्ष जातक को धन ,शासन सत्ता,अधिकार एवं भौतिक सुखों की प्राप्ति कराता है | इस जन्मांक वाले व्यक्तियों को सूर्योदय के पूर्व उठाना चाहिए तथा उगते हुए सूर्य के दर्शन करना भाग्यप्रद रहता है. समाज, राष्ट्र, संस्था इत्यादि के नेतृत्व सम्बंधित कार्य अथवा मुखिया पद जैसे राष्ट्रपति ,प्रधानमंत्री ,संस्था /संस्थान मुखिया,वित्त ,कमीशन एजेंट कार्य ,ज्वेलरी ,वाहन ,कला एवं डिजायनिंग कार्य ,राज...