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लघुरुद्राभिषेक

लघुरुद्राभिषेक तांबेका लोटा लेकर उसमें शुध्ध पानी, दूध, चोखा (चावल), बिल्व पत्र, दुर्वा, सफेद तिल, मिलाकर शिवलिंग उपर धृतधारा चालु रखके निम्नोक्त लघुरुद्राभिषेक का पठन ग्यारा बार श्रध्धापूर्वक करने से जीवन में आयी हुई और आनेवाली आधि, व्याधि और उपाधि से छुटकारा मिलता है और सुख शांति प्राप्त होती है । ॐ सर्वदेवेभ्यो नम : ॐ नमो भवाय शर्वाय रुद्राय वरदाय च । पशूनां पतये नित्यमुग्राय च कपर्दिने ॥1॥ महादेवाय भीमाय त्र्यम्बकाय च शान्तये । ईशानाय मखघ्नाय नमोऽस्त्वन्धकघातिने ॥2॥ कुमारगुरवे तुभ्यं नीलग्रीवाय वेधसे । पिनाकिने हिवष्याय सत्याय विभवे सदा ॥3॥ विलोहिताय धूम्राय व्याधायानपराजिते । नित्यनीलिशखण्डाय शूलिने दिव्यचक्षुषे ॥4॥ हन्त्रे गोप्त्रे त्रिनेत्राय व्याधाय वसुरेतसे । अचिन्त्यायाम्बिकाभर्त्रे सर्वदेवस्तुताय च ॥5॥ वृषध्वजाय मुण्डाय जिटने ब्रह्मचारिणे । तप्यमानाय सिलले ब्रह्मण्यायाजिताय च ॥6॥ विश्वात्मने विश्वसृजे विश्वमावृत्य तिष्ठते । नमो नमस्ते सेव्याय भूतानां प्रभवे सदा ॥7॥ ब्रह्मवक्त्राय सर्वाय शंकराय शिवाय च । नमोऽस्तु वाचस्पतये प्रजानां पतये नम: ॥8॥ नमो विश्वस्य पतये म...

कुंडली का पहला भाव यानी लग्न

मित्रों जन्म कुंडली विश्लेष्ण में यदि किसी का सबसे ज्यादा महत्व है तो वो लग्न का है हालांकि अन्य भाव और वर्ग कुंडलियों का भी अपनी अपनी जगह महत्व है लेकिन जब तक लग्न और लग्नेश की सिथ्थी सही नही हो अच्छे से अच्छा योग भी अपना पूर्ण प्रभाव नही दे पाता है| वैसे तो और भाव किसी न किसी अंग को दर्शाता है लेकिन लग्न हमारे पुरे शरीर को दर्शाता है | लग्न से किसी इंसान के व्यव्क्तित्व का पता चलता है समाज में जातक का नाम किस हशिय्त का होगा जातक कितना परोपकारी होगा हालांकि ये भाव 25% ही परोपकारी दर्शाता है बाकी ७५% परोपकार का नवम भाव से पता चलता है| ये भाव हमारे जीवन के पहले भाग यानी 25 वर्ष तक की उम्र को विशेष रूप से दर्शाता है जातक अपने पुराने रिति रिवाजों पर कितना चलताहै उसका इस भाव से पता चलता है| हम पिछले जन्म के कर्मों का कितना भाग इस जन्म में लेकर आये है और उनका कितना फल हमे मिलना है वो इसी भाव से पता चलता है| पहला भाव पूर्व दिशा को दर्शाता है इसिलिय जिस जातक का सूर्य पहले भाव में हो या बहुत अच्छी सिथ्ती में हो उसे पूर्व दिशा का मकान शुभ फल देता है| इसी भाव के द्वारा हमारा वर्तमान कैसा ब...

कुंडली में दुसरा भाव

मित्रों ज्योतिष  में दुसरे भाव  को एक महत्वपूर्ण  स्थान  दिया गया  है  |  ये  सबसे  मुख्य  बात की हमारे  कुटुंब  परिवार  को  दर्शाता   है ,हमारे  द्वारा  किये  जाने  वाले  संचित  धन  और  परिवार  से मिलने  वाले  धन  को ये  भाव  दर्शाता है इसिलिय  सोने  चांदी  का  सम्बन्ध इसी भाव  से  मना  गया  है  | हमारे शरीर में ये  दाई आँख  चेहरे  और  गले  को  दर्शाता  है  |  इस  भाव  को  वाणी  भाव  भी कहा  जाता  है  इसिलिय  हमारी  वाणी  मीठी होगी  या नही  और  गायन  छेत्र  में हमे  कैसी  सफलता  मिल  सकती  है  वो  इसी  भाव  पर  निर्भर  करता  है   \  हमारी  वाणी  का प्रभावशाली  होना  भी  इसी   भ...

चोथा भाव और हमारी कुंडली

मित्रों  आज  कुंडली  के  एक  अहम  भाव   के  बारे  में  लिख  रहा  हूँ | आज के इन्सान  की  सबसे  मुख्य  समस्या  यदि  कोई  है  तो   मानसिक  सुख  ग्रहस्थ  सुख  मकान  वाहन आदि  के   सुख  की   है जातक  को  इनमे  से किसी  न  किसी  समस्या  का सामना अक्सर   करना पड़ता   है  और  ये  सभी  चीजें  चोथे  भाव  से देखि   जाती  है | चोथे भाव  में  अशुभ   ग्रह  होने  पर  जातक  की  मन  की  शान्ति  पर बहुत बुरा प्रभाव  पड़ता है यानी जातक  के  पास  कई  बार  सब कुछ  होते  हुवे  भी कुछ  पास में  न  होने  का अहसास  होता  है  |  जीवन  में विघ्न  आते  रहते है | जातक  का  मन  मुरझाये  हुवे   फुल  ...

पंचम भाव

मित्रों भाव  के  सम्बन्ध  में आज  हम  पंचम  भाव  से  क्या  क्या  देखते  है  उस  पर  कुछ  लिख  रहा  हूँ  | पंचम  भाव  कुंडली  के  मुख्य  भावों में स्थान  प्राप्त  है  क्योंकि इसकी  गिनती त्रिकोण में होती  है |पंचम  भाव  से  मुख्य  रूप  से  सन्तान  विद्या  बुद्धि को  देखा  जाता  है  \ ये  हमारी  समझ  का  भाव  होता  है  की  हमारी  समझ  कैसी  है  हम  अपनी  बुद्धि  का किस  प्रकार  से कितना  प्रयोग करते  है  | मानसिक  तौर पर  हमारी  चेतनता  कितनी  है  , हमारे  मन   में इमानदारी किस हद  तक  है  , जमाने  में हमारा  नाम  मान कैसा  है  यानी की समाज में हमारा  मान  सम्मान कैसा  है  उसका  पता  भ...

छटा भाव

मित्रों  आज की  भागमभाग  की  जिन्दगी  में   इंसान  की  जो  सबसे  बड़ी  समस्या  होती  है   वो  ऋण   रोग  शत्रु  मुख्य  रूप  से   होते  है  और  यदि   इंसान  इनसे  बचा  रहता  है  तो   उसे हम   एक   सुखी  इंसान  की  संज्ञा   दे  सकते  है  और  इन  सभी  चीजो  को  जो   भाव   कुंडली  में  दर्शाता  है  वो  छटा   भाव  होता  है | छटा  भाव हमारे  आंतरिक  मन  के  साथ  साथ बाहरी  शरीर  को  भी  दर्शता  है  | छटा  भाव   हमारे  मानसिक  संताप , दुश्मनी  , बिमारी ,ननिहाल , नौकरी , रखैल , भुत बाधा , पेट पाचन   शक्ति , कर्ज  और फौजदारी  मुकदमे   का  कारक  भाव  है | यदि  इस  भाव  में  कोई   ग्र...

सप्तम भाव और ज्योतिष

मित्रों  ज्योतिष  सप्तम भाव  को अहम  भूमिका  सोंपी  गई  है  \ सप्तम  भाव  से  मुख्य  रूप  से  विवाह के  बारे   में देखा  जाता है  \  शादी  सही  समय  पर  होगी  या  नही  , कितनी  शादिया  होगी  और  विवाहिक  जीवन  कैसा  रहेगा  इन  सभी  प्रश्नों  के  उतर खोजने  में इस  भाव  की  अहम  भूमिका  होती  है  \  जातक  का  जीवन  साथी  कैसा  होगा  उसका  रूप  रंग  स्वभाव  सब  कुछ  इसी  भाव  पर  निर्भर  करता  है  \  शुक्र और  बुद्ध   इस  भाव  का कारक  ग्रह  है  इसिलिय  शुक्र बुद्ध    की  कुंडली  में सिथ्ती  पर  इस  भाव के  फल  मुख्य  रूप  से  निर्भर  करते  है  \ {आप...